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रविवार, 10 मई 2015

दिनेश त्रिपाठी के अवधी मुक्तक


 अवधी के महत्वपूर्ण समकालीन रचनाकार दिनेश त्रिपाठी 'शम्स' किसी परिचय के मोहताज़ नहीं । आज मातृ दिवस के अवसर पर उनके दो अवधी छंद आप भी पढ़ें ! प्रस्तुत हैं इसी क्रम में Dinesh Tripath जी खरखइंचा ब्लॉग पर !












                                                                         (1)

दुनिया से मिलै दुःख क्लेश मुला

अचरा माँ लिए आह्लाद हैं अम्मा

बिरवा जस पूत बढ़ै सरसैं 

जल घाम बयार औ खाद हैं अम्मा ।

दिन रात खपैं न थकैं कबहूँ 

कबहूँ न करत प्रतिवाद हैं अम्मा ।

सबके मुख कै मुस्कान बनीं 

सगरिव घर कै बुनियाद हैं अम्मा ॥
                                                     
                                                   (2)
                                
जग के टकराव कोलाहल माँ

सुख - शान्ति कै आँगन हैं महतारी ।

ममता कै फुहार उड़ेलैं सदा

सुत के हित सावन हैं महतारी ।

लरिके कछु बोलैं न बोलैं मुला 

पढ़ि लेंय सदा मन हैं महतारी ।

सब तीरथ मंदिर मस्जिद से 

बढ़ि कै अति पावन हैं महतारी ॥

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