अवधी के महत्वपूर्ण समकालीन रचनाकार दिनेश त्रिपाठी 'शम्स' किसी परिचय के मोहताज़ नहीं । आज मातृ दिवस के अवसर पर उनके दो अवधी छंद आप भी पढ़ें ! प्रस्तुत हैं इसी क्रम में Dinesh Tripath जी खरखइंचा ब्लॉग पर !
(1)
दुनिया से मिलै दुःख क्लेश मुला
अचरा माँ लिए आह्लाद हैं अम्मा
बिरवा जस पूत बढ़ै सरसैं
जल घाम बयार औ खाद हैं अम्मा ।
दिन रात खपैं न थकैं कबहूँ
कबहूँ न करत प्रतिवाद हैं अम्मा ।
सबके मुख कै मुस्कान बनीं
सगरिव घर कै बुनियाद हैं अम्मा ॥
(2)
जग के टकराव कोलाहल माँ
सुख - शान्ति कै आँगन हैं महतारी ।
ममता कै फुहार उड़ेलैं सदा
सुत के हित सावन हैं महतारी ।
लरिके कछु बोलैं न बोलैं मुला
पढ़ि लेंय सदा मन हैं महतारी ।
सब तीरथ मंदिर मस्जिद से
बढ़ि कै अति पावन हैं महतारी ॥
वाह अवधी के अनुपम छन्द पढ़ कर अनन्त हर्ष प्राप्त हुआ
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