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रविवार, 19 अक्टूबर 2025

भारतेंदु दद्दा कै याद औ 'खरखइंचा' के आरंभिक अंक कै लोकार्पण... अमरेन्द्र अवधिया कै रपट



भारतेंदु दद्दा कै याद औ 'खरखइंचा' के आरंभिक अंक कै लोकार्पण...  अमरेन्द्र अवधिया कै रपट


काल्हि प्रेस क्लब लखनऊ मा हिन्दी औ अवधी कै साहित्यकार भारतेंदु मिश्र जी के याद मा यक कार्यक्रम रखा गा रहा। (यही महीना केरी 10 तारीख क भारतेंदु दद्दा के असामयिक निधन कै खबर मिली रही।) कार्यक्रम परिचर्चा, लोकार्पण, सम्मान औ सरधांजलि चारौ कै मिला-जुला रूप लिहे रहा। जहाँ यक वारी दद्दा कै याद औ भावुकता कंठ अउर आँखि पनियाये रही ह्वईं दुसरकी वारी दिमाग पै दद्दा के उल्लेखनीय अवदान का रेखांकित करै कै दबाव रहा। सबही अपनी समझ औ सबदन मा दद्दा ते आपन जुड़ाव रखिस। यहि कार्यक्रम मा हमहूँ बतौर वक्ता रहेन, कुछ बातन का रपटनुमा होइके रखत अहन ।


अवधी पत्रिका 'खरखइंचा' के भारतेन्दु अंक औ 'भाखा की गठरी' का लोकार्पण


वक्ता-वक्तव्य के वारी से चली तौ कार्यक्रम कै सुरुआती वक्तव्य खरखइंचा पत्रिका कै संपादक शैलेन्द्र शुक्ल दिहिन। पत्रिका के भारतेंदु मित्र अंक कै आवै कै पूरी योजना विस्तार से बताइन। संपादकीय बतकही के अलावो, वै अऊरौ महत्वपूर्ण बात कहिन। शैलेन्द्र कै ई इस्थापना मर्मग्राही, यही ते असरदार, रही कि भारतेंदु दद्दा अवधी गद्य कै पढ़ीस हुवैं। अवधी गद्य के विकास मा ओनके योगदान कै बहुविध चर्चा किहिन। भारतेंदु मिश्र केरी आत्मकथा क वै अवधी गद्य मा यक महत्वपूर्ण परिघटना के रूप मा देखिन। दद्दा क समर्पित यक भावभीनी कवितौ शैलेंद्र सुनाइन -
अवधी कै जब-जब बात चली,
दद्दा तुम अइहौ याद बहुत...


अपन वक्तव्य देत भए खरखइंचा संपादक शैलेन्द्र कुमार शुक्ल

अगले वक्ता के तौर पै अमरेन्द्र अवधिया गोहरावा गये। यै कहिन कि हम बगैर भावुक भये आपन बाति रखै कै कोसिस करब ताकि 'बाति' जौन कहा चाहित है कहि सकी। भारतेंदु जी के साथ अपने दिल्ली के दिनन केरी यादन औ मुलाकातन कै जिक्र किहिन। यै कहिन कि दद्दा के अंदर तमाम अऊर चीजन के साथ ई दुइ चीज जरूर देखी जाय - 1) आत्मालोचन, 2) असहमति के साथ सहज रहब। अवधी मा बीते कयिउ दसकन से अपने समय, समाज, संस्कृति, अदबी दुनिया औ 'स्व' के जरूरी आलोचन कै अभाव देखाये। पुराने समय मा तब्बो आत्मालोचन देखाइ जात रहा। पढ़ीस कै कविता 'हम कनवजिया बाभन आहिन' आज के लिखा चाहे! सुखद ई कि भारतेंदु जी के हियाँ यहि आत्मालोचन कै महत्व समझा गा अहै। 'लखनऊ' पै लिखी उन केरी आलोचनात्मक कविता कै जिक्र कीन गा। यही तरह भारतेंदु दद्दा केरी सखसियत कै ई बिसेसता रही कि वै मत-भिन्नता या असहमति क लइके असहज नाहीं हुवत रहे, ओहका फूलै-फरै कै मौका दियत रहे।


वक्तव्य देत भए अमरेन्द्र अवधिया

प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र भारतेंदु जी के साथ कै आपन आत्मीयता याद किहिन। अवधी मा रचनात्मक सक्रियता बनी रहै, यहिके तईं भारतेंदु जी केतना जागरूक रहत रहे, यहिका बताइन। भारतेंदु जी संपादित 'कथा-किहानी' किताब अवध विश्वविद्यालय मा अवधी से संबंधित पाठ्यक्रम कै जरूरत पूर करै वाली किताब बनी। यहि किताब केरी कहानिन क पाठ्यक्रम मा सामिल करावै कै उद्यम औ वहि दौरान भारतेंदु जी कै मार्गदर्शन सहायक रहा। कार्यक्रम कै अध्यक्षता करत प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित के वहि योगदानौ का शैलेन्द्र जी रेखांकित किहिन जौन वै लखनऊ विश्वविद्यालय मा, बतौर विभागाध्यक्ष, किहिन।

आपनि बाति रखत भए डॉ. शैलेन्द्र नाथ मिश्र


मुख्य वक्ता पद्मश्री विद्याबिन्दु सिंह भारतेंदु जी के व्यक्तित्व कै अच्छाई बतावेक् साथे ओनके 'चंदावती' उपन्यास के भूमिका लिखै वाले दिनन क याद किहिन। भारतेंदु जी के यहि उपन्यास कै भूमिका लिखेक रहा, तौ चित्रा मुद्गल जी कहिन कि विद्या जी लिखैं। औ, जब भूमिका लिखि गै तौ तारीफ करत कहिन कि अस भूमिका, औ अवधी मा, हम न लिखि पाइत जेस विद्या जी लिखिन। मेहररुवन कै चरित्र, जीवन अउर संघर्ष भारतेंदु जी अपने अवधी लेखन के जरिये रखिन जौन बहुत अहमियत रखत है, अस विद्या जी कै विचार रहा।


श्रद्धांजलि वक्तव्य : पद्मश्री विद्याविन्दु सिंह

कार्यक्रम-अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित जी भारतेंदु मिश्र के योगदान कै सांगोपांग चर्चा किहिन। दीक्षित जी ई टीसौ उघारिन कि भारतेंदु जी क कहूँ विश्वविद्यालय या कॉलेज लेवल पै (जीविकोपार्जन के साथे) सक्रिय हुवेक रहा, मुला यहिका वै चुनौती के नाईं लिहिन औ अपने महत्वपूर्ण लेखन के जरिये ई अभाव पाटिन। भारतेंदु जी कै आरंभिक जीवन प्रगतिसील आंदोलन से जुड़ा रहा, यही कारन उनके लेखन मा प्रगतिसील सरोकार हमेसा रहा। साहित्य के नये ट्रेंड का वै पकरै मा चूकत नाहीं रहे। जब दोहा कै ट्रेंड आवा, 700 दोहा लिखि डारिन, गजल कै माहौल देखान तौ अवधी गजल लिखिन, गीत-नवगीत मा ढेर के लिखबै किहिन। संस्कृत साहित्य कै विधिवत विद्यार्थी हुअब ओनके साहित्तिक लेखन क बहुबिध समरिध करत है। ओनके लेखन क हिगारब औ सही मूल्यांकन ओनके प्रति सच्ची सरधांजुरि होये।

कार्यक्रम मा अध्यक्षीय वक्तव्य देत भए प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित

यहि कार्यक्रम मा 'भाषा की गठरी' किताब कै लोकर्पणौ भवा। खरखइंचा संपादक शैलेन्द्र शुक्ल कै सम्मान कीन गा। रश्मिशील जी कै सक्रियता यहि सफल कार्यक्रम के सिद्धि कै आधार बनी। स्रोता लोगन कै भावभरी उपस्थिति सराहनीय रही।


सम्मान


सभागार मा उपस्थित सहृदय श्रोतागण

कार्यक्रम कै संचालन नवीन शुक्ल जी करिन औ स्वागत वक्तव्य सुनील कुमार वाजपेई जी दीहिन। कार्यक्रम मा सर्वेश अस्थाना, डॉ. रंजना मिश्र, गंगा प्रसाद शर्मा गुणशेखर, सूरज कुमार, ललित कुमार शुक्ल, विनय दास, उमाशंकर तिवारी, शैलजा, उमाशंकर शुक्ल 'शतिकण्ठ', मनीष सिंह, नवीन आवारा, मंजुल मिश्र 'मंजर', पूनम, अस्मिता एवं अनुपम इत्यादि लोग उपस्थित रहे।


रपटक - अमरेन्द्र अवधिया