चुल्लू भर पानिम डूबि मरौ
हे भारत! कुछ तौ शरम करौ
कल जगन्नाथ की धरती पर
मरिगै किसान कै पुत्रबधू
आगे की घटना अइसी की
निकरत है मुह से थू थू थू।
कल भारत मा यक काँधे पर
यक स्त्री कै शव ढोवा गा
यहि एक अरब जनसंख्या से
वहिकै ना भार उठावा गा।
मरि जाव देश! हे धरम मरौ!
चुल्लू भर पानिम डूबि मरौ
हे भारत! कुछ तौ शरम करौ
कल वहि किसान की घरनी का
ना काँधा चार नसीब भये
हम भारत के मानव सारे
मानवता माहि गरीब भये
काँधे पर अपने लिहे लाश
ऊ जतने क़दम गुजारिस है
भारत की जनता का धरती
रहि रहि वतना धिक्कारिस है
मंत्री अफसर तुम उखरि परौ
चुल्लू भर पानिम डूबि मरौ
हे भारत! कुछ तौ शरम करौ
कउनौ चोरकट नेता खातिर
लाखन की भीड़ निकरि आवै
हीरो हिरओइन का देखै
जत्था कै जत्था चलि आवै
पर कल गरीब की एक लाश
खातिर कोई ना निकरि सका
भारत अतना कमजोर भवा
निर्धन कै भार न सम्हरि सका
अब बइठ कै कबिता,बहस करौ
चुल्लू भर पानिम डूबि मरौ
हे भारत! कुछ तौ शरम करौ
कल धरम करम वाले केवल
चन्दन पोते बइठे रहिगे
मजदूर किसानन के पापा
माओ लेनिन करतै रहिगे।
स्त्रीवादी,कवि,प्रोफेसर
सब पढ़े लिखे,मानववादी
ई सब एसी मा बइठ बइठ
करतै रहिगे कल बुकरादी
इसकूल अउर यूनीसीटी
चूल्हा-भारे मा जाइ जरौ
चुल्लू भर पानिम डूबि मरौ
हे भारत! कुछ तौ शर्म करौ
-सर्वेश त्रिपाठी


अत्यंत सटीक अउर सारगर्भित कविता खातिर बधाई...एहसे बड़ी बात अउर का होई। सोचौ तो केवल लज्जा आवति है।।।
जवाब देंहटाएंअत्यंत सटीक अउर सारगर्भित कविता खातिर बधाई...एहसे बड़ी बात अउर का होई। सोचौ तो केवल लज्जा आवति है।।।
जवाब देंहटाएंवाकई शर्मिंदा कर देने वाली घटना है ये । करारी चोट करती है ये कविता अपनी भाषा में अपने लोगों के मर्मस्थल पर ।
जवाब देंहटाएंसर्वेश जी अपनी बात कहने में सफल रहे हैं ।
वाकई शर्मिंदा कर देने वाली घटना है ये । करारी चोट करती है ये कविता अपनी भाषा में अपने लोगों के मर्मस्थल पर ।
जवाब देंहटाएंसर्वेश जी अपनी बात कहने में सफल रहे हैं ।
सर्वेश जी नमन आपकी लेखनी को ... बहुत ही मुखर और ठोस अभिव्यक्ति बेशक इक करारा तमाचा है आज की स्थिति पर ...
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