हम
फूंकि द्याब दुनियकि बलाइ
हम गाँउ घरन के लरिका
हन
हम जानिति केतने पानि म हैँ
हम सहरू देखि के आयेन है
हम जानिति केतने दानी है
दानिन मा पानी नाइ बूँद
हम यहउ बतइब दुनिया ते
तुमरी चंटइ कि गगरी का
हम फेँकि द्याब ऊँचे पर ते
कोने अँतरउ मा दिया बारि
हम फूँकि दैब दुनियकि बलाइ ।।
हम जानिति केतने पानि म हैँ
हम सहरू देखि के आयेन है
हम जानिति केतने दानी है
दानिन मा पानी नाइ बूँद
हम यहउ बतइब दुनिया ते
तुमरी चंटइ कि गगरी का
हम फेँकि द्याब ऊँचे पर ते
कोने अँतरउ मा दिया बारि
हम फूँकि दैब दुनियकि बलाइ ।।
करिया अच्छर हम भइँस नाइ
हमहुँ एमफिल पीएचडी हन
हम जानति हइ तुमहूँ का हउ
हम जानिति हइ हमहूँ का हन
हमरे हत्थे जब चड़ि जइहौ
तब आँखिन ते लागी देखाई
ऊँचि बातन की दूरि धरउ
तुमका सनकउ लागी सुनाइ
यह नाइ जवाहिर की खेती
हम भूँकि दैब दुनियकि बलाय ।।
हमहुँ एमफिल पीएचडी हन
हम जानति हइ तुमहूँ का हउ
हम जानिति हइ हमहूँ का हन
हमरे हत्थे जब चड़ि जइहौ
तब आँखिन ते लागी देखाई
ऊँचि बातन की दूरि धरउ
तुमका सनकउ लागी सुनाइ
यह नाइ जवाहिर की खेती
हम भूँकि दैब दुनियकि बलाय ।।
हमरिहु दियारिन मा बाती
हमरी देरिन मा तेलु आहि
हमरी मेहनति मा आगी है
सबु तुमहूँ का लागी देखाइ
तुमरी अक्किलि ते देसु चला
यहु अबहीँ लौ भरि पाये हन
मनइन की छाड़उ औरि बात
हम लरिकन लहु ते गायेन हइ
अब खूनु पसीना मिलि जाई
हम फूँकि दैब दुनियकि बलाइ ।।
-शैलेन्द्र कुमार शुक्ल
हमरी देरिन मा तेलु आहि
हमरी मेहनति मा आगी है
सबु तुमहूँ का लागी देखाइ
तुमरी अक्किलि ते देसु चला
यहु अबहीँ लौ भरि पाये हन
मनइन की छाड़उ औरि बात
हम लरिकन लहु ते गायेन हइ
अब खूनु पसीना मिलि जाई
हम फूँकि दैब दुनियकि बलाइ ।।
-शैलेन्द्र कुमार शुक्ल